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मेरी रचनाएं...

मेरे राजदार समर्थक मित्र बनने का शुक्रिया


गुरुवार, 25 अगस्त 2011

कोरे सपने.......



बिना तुम्हारे बंजर होगा आसमान 
उजड़ी सी होगी सारी जमीन 
फिर उसी धधकते हुए सूर्य के प्रखर तले 
सब ओर चिलचिलाती काली चट्टानों पर 
ठोकर खाता, टकराता भटकेगा समीर 
भौंहों पर धुल-पसीना ले तन-मन हारा 
बेचैन रहूंगा फिरता मैं मारा-मारा
देखता रहूँगा क्षितिजों की 
सब तरफ गोल कोरी लकीर 
फिर भी सूनेपन की आईने में  चमकेगा लगातार 
मेरी आँखों में रमे हुए मीठे आकारों का निखर 
मैं संभल न पाऊंगा डालूँगा दृष्टि जिधर 
अपना आँचल फैलायेगी वह सहज उधर.......
नीलकमल वैष्णव"अनिश"
०९६३०३०३०१०
०९६३०३०३०१७

बुधवार, 17 अगस्त 2011

ज्ञान की कुंजी......

ज्ञान की कुंजी  
बिना किराये का मकान  - जेल  

सुबह की घड़ी               - मुर्गा

कलयुग का अमृत         - चाय 

कलयुग का देवता         - चोर 

आज की स्टाइल          - बाब कट 

आज की फिल्म           - मार-धाड़ 

खेत का राजा              - किसान 

हमारे स्कूल का सेन्टर  - बैरान 

चारा घोटाले का नायक - लालू प्रसाद यादव 

आज का गुंडा             - पुलिस 

घोटाले का राजा          - नरसिंह राव 

कापियों में सबसे आगे - रफ कापी 

इज्जतदार आदमी      - माफिया डान 

मार-धाड़ करने में सबसे आगे - स्कूली विद्यार्थी

सेर सुनने में मजा आता है, सेर सुनाने में मजा आता है 
अगर हो शेर सामने तो फिर... भागने में मजा आता है !!!
हा हा हा हा हा हा हा..... 
दोस्तों आज के लिए इतना ही बाकी
किसी और दिन सुनायेंगे अब अपने 
इस ब्लागर मित्र को विदा दीजिये नमस्कार...


नीलकमल वैष्णव "अनिश"
http://neelkamalkosir.blogspot.com
http://neelkamal5545.blogspot.com
http://neelkamaluvaach.blogspot.com

सोमवार, 15 अगस्त 2011

15 अगस्त....


आप सभी मित्रों को स्वतंत्रता की ६५ वीं सालगिरह 
के इस पावन अवसर की अनेकानेक बधाईयाँ
आज हमारे देश को आजाद हुए ६५ वर्ष हो गए,
पर क्या हम सचमुच सम्पूर्ण रूप से
आजाद हैं ? 

क्या यह वही भारत है जिसका सपना हमारे 
वीर सपूतों ने अपनी प्राणों की बलिदान 
देकर देखी थी ?

पहले हम अंग्रेजों के गुलाम थे पर आज  हम
महंगाई, भ्रष्ट नेताओं और अफसरों के
गुलाम है,


महंगाई इस कदर हमें घेर चुकी 
है जहाँ से निकालने का कोई राह दिखाई
नहीं पड़ रही है
इस महंगाई रुपी डायन का अत्याचार 
इस कदर है कि इसकी मार सभी 
वस्तुओं पर देखी जा सकती है इसकी
असर को
खैर मैंने तो आप लोगों को स्वतंत्रता दिवस 
कि बधाई देने के लिए लिखना शुरू किया 
था पर मैं भटक कर कहाँ जा रहा हूँ इस
महंगाई के फेर में ........

पर एक बात जरुर बोलूंगा कि मुझे तो पता
है की मैं भटक कर कहाँ जा रहा था पर...
क्या किसी को पता है की यह देश की 
महंगाई कहाँ और किस ओर जा रही है ???
नीलकमल वैष्णव"अनिश"
http://neelkamalkosir.blogspot.com
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http://neelkamaluvaach.blogspot.com 

शनिवार, 13 अगस्त 2011


आप सभी ब्लागर पाठकों को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं 
नीलकमल वैष्णव "अनिश"

सोमवार, 8 अगस्त 2011

व्यंगात्मक क्षणिकाएं......


व्यंगात्मक क्षणिकाएं......
१:-
वे रिश्वत लेते हुए 
पकड़े गए रंगे हाथों
अगले दिन रिश्वत देकर 
छुट भी गए लगे हाथों.

२:-
ऊपरी आमदनी का एक हिस्सा 
वे अपने सीनियर को खिला रहे हैं
दरअसल वे 
जमाने के साथ चल कर 
ताल से ताल मिला रहे हैं.

३:- 
ये फिल्म वाले भी 
क्या "गजब" ढा रहे हैं 
पहले लगाई "हथकड़ी"
और किया "गिरफ्तार" 
करायी "जेल यात्रा" 
और फिर लगवाई "फांसी"
लेकिन अब "आरक्षण" भी दिला रहे हैं.

४:-
नेता से अभिनेता बनने की बात 
तब उनके दिमाग में आई 
जब चुनाव में उनके
सबसे कमजोर प्रतिद्वंदी ने 
उनकी जमानत जब्त करवाई. 

५:-
फिल्म की हिरोइन का मूड 
तब से अपसेट था 
जबसे उसे मालूम हुआ 
कि जिसे उसने चुम्बन सीन दिया 
वह हीरो नहीं डुप्लीकेट था. 

६:-
एक निर्देशक नेताजी को बतौर हीरो
अपनी फिल्म में लाये 
लेकिन वे सिर पिटते रह गए 
जब नेताजी चुनावी वादे कि तर्ज पर 
शाट देने पांच साल बाद आए. 

७:- 
इंजन चक्की देख के दिया फकीर रोए
साहब बाबू के बिच में फ़ोकट जाए न कोए. 

८:- 
बाबुल कि दुआएं लेती जा, जा तुझको सुखी संसार मिले
तू बेड पर पड़ी सोती रहे, पति खाना लिए तैयार मिले.......

नीलकमल वैष्णव "अनिश"